जर्जर बसों के सहारे यात्रा करने को विवश मुसाफिर !

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राजीव झा : बिहार के लगभग सभी जिलों के बस स्टैंड की हालत बद से बदतर स्थिति में बनी रहती है उसमे भी खासकर बरसात के मौसम में तो और भी नरक बन जाता है| आज हम सहरसा जिले के बस स्टैंड की बात कर रहे है |koshixpress

बस स्टैंड की हालत बद से बदतर 

सहरसा बस स्टैंड की नीलामी से लाखों रूपया नगर परिषद् को लाभ होता है और उसके बदले में आम जन को सुबिधा कुछ प्राप्त नहीं होता है । सरकार्री  बस स्टैंड प्रशासन की लापरवाही से जंगल और अतिक्रमण कारियों के कब्जे में है ,और जहाँ वर्तमान में लोगों को लाभ मिलना चाहिए वहां सुबिधा नाम की कोई चीज ही नहीं है। सहरसा बस स्टैंड से लगभग ढाई से तीन हजार बड़ी और छोटी गाड़ी प्रतिदिन खुलती है । वर्षों पुरानी गाडी को गाड़ी मालिक घिस पिट के बाजार में चलाते है और ट्रांसपोर्ट अधिकारी जर्जर गाड़ी को भी मिलीभगत से चलवाते है। जिला प्रशासन के द्वारा न तो किसी भी गाड़ी का किराया तय किया जाता है और न ही बस या बस स्टॉप से सम्बंधित मुद्दे पर नजर देती है ।koshixpress

राजस्व की जहाँ तक बात है भिन्न भिन्न की तरह की गाड़ी से किसी न किसी तरह सरकार को राजस्व पूरा कर दिया जाता है । सहरसा बस स्टॉप से सुपौल,पूर्णिया,मधेपुरा,बीरपुर,फरविसगंज,मधुबनी आदि कई जगहों के लिए गाड़ी खुलती है। बस स्टॉप से निकलने वाली गाड़ी में अधिकतर गाड़ी का रजिस्टेशन फ़ैल रहता है,पॉल्यूशन,इंसोरेंस,फिटनेस आदि कुछ भी नहीं रहने के बाद भी धरल्ले से गाड़ी सड़को पर चल रहा है।

जदयू के नेता हेमराज मुन्ना से कहा कि यह सहरसा वासी के लिए दुःखद है कि कई जगह से आने वाले लोग इस बस स्टॉप पर भला बुरा कह के चले जाते है और जिला प्रशासन इस पे ध्यान नहीं देती।बिनोद कुमार सिंह ने कहा कि यहाँ का हालत ऐसा है कि चलना मुश्किल हो जाता है प्रदुषण ,गाड़ी मालिक की भाड़ा की मनमानी,जर्जर गाड़ी की हालत पता नहीं बिहार में किया हो रहा है किसी पे किसी तरह की कार्यवाही नहीं होती। जब इस से सम्बंधित क्षेत्रीय परिवहन पदाधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की तो उनका तबादला हो गया जिसके कारण संपर्क बेकार साबित हुआ।खैर अब तो समय ही बताएगा कि बस से बस स्टॉप तक कब मुलभुत सुबिधा उपलब्ध करवाता है।