गांवों में नोट है कम,फिर भी लोग बम-बम !

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हजार व पांच सौ के नोटों पर प्रतिबंध लगने के एक सप्ताह बाद भी विभिन्न बैंकों में लोगों की कतार

संजय कुमार सुमन :हजार व पांच सौ के नोटों पर प्रतिबंध लगने के एक सप्ताह बाद भी विभिन्न बैंकों में लोगों की कतार लग रही है। बैंकों में लोग कतार में खड़े रुपया निकालने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते देखे जा रहे हैं। बैंकों से नकदी निकालने व जमा करने को लेकर विगत एक सप्ताह से लोगों की भीड़ जमा हो रही है।

मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड स्टेट बैंक में एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी बैंक खुलने से पहले से ही मुख्य गेट पर महिला व पुरुषों की भीड़ लगी रहती है । यही हाल जिले के सभी बैंकों की है। इधर शाखा प्रबंधक राजकुमार ने बताया कि बैंक में दो स्टाफ हैं। इसके अतिरिक्त सीएसबी कर्मियों को भी लगाया गया है। फिर भी लोगों की भीड़ कम नहीं हो रही है। धीरे धीरे भीड़ सामान्य होने में अभी एक सप्ताह और लगेगा।

चौसा प्रखंड समेत जिले के बैंकों में लगी भीड़ अब सड़क तक दिखाई पड़ने लगी है। एक ओर जहां अब लोगों द्वारा जमा कम, बल्कि निकालने की भीड़ बढ़ती जा रही है। सबसे समस्या यहां खुदरा को लेकर है। अब तो रूपए के कारण यहां के बाजारों पर भी प्रभाव पड़ने लगा है। बाजारों से भीड़ गायब होती चली जा रही है। लोग अब बैंक से खुदरा नोटों की मांग कर रहे हैं, कोई एक्सचेंज करके तो कोई खाते से रूपए निकासी की मांग कर रहे हैं।koshixpress

बाजार में किराना से लेकर सब्जी तक खरीदने वालों की भी कमी हो गयी है। बैंकों में भीड़ से लोगों की परेशानी कम नहीं हो पा रही है। लोग दिन-दिनभर बैंकों की लाईन भूखे-प्यासे लगे हुए हैं तथा जमा-निकासी कर रहे हैं। यद्यपि लोग काफी समझदारी से काम ले रहे हैं कहीं से भी कोई हो-हंगामा नहीं हो रहा है तथा उन्हें लग रहा है कि मोदी जी बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं।

गांवों में नोट है कम, फिर भी लोग बम-बम

पिछले छह दिनों से ग्रामीण क्षेत्र के लोग सुबह होते ही विभिन्न बैंकों की ओर मुखातिब हो जाते हैं। वैसे ग्रामीण क्षेत्र होने के नाते लोगों के पास बड़े नोट तो कम ही हैं। फिर भी जितने बड़े नोट ग्रामीणों के पास उपलब्ध हैं,उसे बदलना या जमा करना परिपेक्ष्य में जरूरी हो गया है। लोगों का कहना है कि नोट बदली करने में परेशानी हो रही है। यहां पहले बड़े नोट जमा किए जा रहे हैं। फिर उसकी निकासी की जा रही है। ऐसे में लोगों को दो-तीन दिन तक लगातार बैंक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। नोट को बदलने की व्यवस्था आस-पास के बैंकों में सुगम नहीं है।

नोटबंदी का असर बाज़ारों में साफ दिख रहा है

बैंकों से मिले 2000 के नोट के कारण भी छोटे किसानों व व्यवसायियों को शुरुआत में थोड़ी परेशानी हुई,लेकिन अब स्थिति सामान्य होने लगी है। अरविन्द कुमार,सुबोध यादव,पंकज कुमार बताते हैं कि गांव में रहने वाले लोगों के पास ज्यादा पैसे नहीं है। इस कारण परेशानी भी ज्यादा नहीं है। लेकिन शुरुआत में जब पैसे बदलने थे तो थोड़ी परेशानी जरुर हुई। एक बारगी छोटे दुकानदार व किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगी है।

वहीं किसान सुभाष यादव ने बताया कि खेती के लिए रखे पैसों में बड़े नोट शामिल थे। इसलिए इसे बैंक में जमा करने फिर इसकी निकासी करने में थोड़ी परेशानी हुई। इस कारण खेती में थोड़ा विलंब हुआ। लेकिन अब बैंक से निकले बड़े नोट भी खुदरा हो चुके हैं। अलग बात है कि कुछ सामानों की खरीदारी एक बार ही करनी पड़ी। साथ ही मजदूरों को भुगतान में भी उनसे समन्वय स्थापित कर बैंक से निकले बड़े नोट देने पड़े।