आशियाना संजोने की चाहत ने डिस्टेंपर के आगे चूना की चमक फीका कर दिया !

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मधेपुरा (संजय कुमार सुमन) : हर दिल की ख्वाहिश एक अपना आशियाना बनाने की होती है। आशियाना को संजोने की चाहत भी स्वाभाविक है लेकिन बात जब आशियाने में रंग भरने की होती है तो कोशिश यही रहती है कि रंग ऐसा हो कि लोग हो जाए दिवाना और कह उठे वाह क्या बात है। कल तक पेंट का मतलब चूना हुआ करता था लेकिन अब पेंट का मतलब वालपूटी और ह्वाइट सीमेंट रह गया है। डिस्टेम्पर एवं प्लास्टिक पेंट अब स्टेटस सिममबल बनता जा रहा है।koshixpress

गांव तक सिमट गया चुना 

आधुनिक परिवेश में डिस्टेंपर के आगे चूना की चमक फीकी पड़ती जा रही है। लोगों की मानें तो अभी के समय में डिस्टेंपर ही दीपावली के लिये कारगर है। एक बार लगा देने से वर्षों तक घर की रौनकता बनी रहती है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में पीडिटिंग की मांग ज्यादा है। जिसे चूना में मिलाकर कलर बना रंगा जाता है।

महंगे आइटम की धमक

बाजार नामी गिरामी कंपंनियों के वालपूटी,डिस्टेम्पर एवं प्लास्टिक पेंट से सजे हुए हैं। आम लोग इतने चूजी हो गये हैं कि कीमत उनके लिए कोई मायने नहीं रखती है। लोगों का नजरिया अपने रहन सहन को लेकर इन दिनों काफी बदल सा गया है। व्हाईट सीमेंट चार सौ रूपये बोरा मिलता है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष रंगों की कीमत 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उच्च वर्ग के लोग रायल पेंट को अपनाने लगे हैं।

रंगों का चयन

घर का रंग रोगन इतना खर्चीला हो गया है कि अब यह बार-बार कराने की चीज नहीं रह गयी है। ऐसे में घरों में रंग भरने से पहले विस्तृत विचार विमर्श जरूरी हो जाता है। खासकर बजट  के अनुरूप पेंट हो यह सबसे महत्वपूर्ण होता है। आज कल घर के अंदर और बाहर अलग-अलग पेंट का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। कहते हैं कि ‘दुल्हन वही जो पिया मन भाए’ इसी तर्ज पर तो पेंट वहीं जो सजनी मन भाए।koshixpress

 नक्कलों से रहे सावधान

स्याह सच है कि बाजारवाद की गला काट प्रतिस्पद्र्धा में बाजार में ऐसा कोई प्रोडक्ट नहीं जिसकी नकल मौजूद नहीं है। ऐसे में विश्चसनीय दुकानों से ही कीमती पेंट खरीदने में समझदारी है।

 ट्रेंड पेंटरो की पूछ बढ़ी

पारंपरिक रूप से पेंट काने वाले मजदूरों की इन दिनों डिमांड काफी कम हो गयी है क्योंकि महंगे पेंटों एवं नई तकनीक से होने वाली कामों में दक्ष नहीं होने की वजह से लोग इन्हें नहीं बुलाते है। बाजार में कम संख्या में मौजूद दक्ष पेंटरों की ही डिमांउ ज्यादा रहती है। पेंटर संजय शर्मा,मुकेश बताते हैं कि अब चूना देने का समय ढल गया है। लोग पेंट करने के लिये ट्रेंड पेंटरों को ही बुलाते है।