चीन के सामान का बहिष्कार,बुद्धिजीवियों ने रखी अपनी बात !

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मधेपुरा : ग्रामीण इलाकों में भी चाइना समान का वहिष्कार किया जा रहा है । मुरलीगंज से सटे मीरगंज चौक के बुद्धिजीवी व्यक्तियों ने भी अपना समर्थन जताते हुए लोगों से इस बार दिवाली में मेक इन चाइना का उपयोग नही करने की अपील की है तथा इस दिवाली में चीनी समान को छोड़कर अपने भारत के निर्मित समान उपयोग करने को कहा है।

मीरगंज निवासी रिप्पू ने कहा कि चीन निर्मित समान छोड़कर अपने स्वदेशी समान का उपयोग करे जिससे हमारे देश की आर्थिक व्यवस्था मजबूत हो सके। इस पुरे मामले में देश के युवा को आगे आना होगा ताकि चीन के आर्थिक घुसपैठ को रोका जा सके ।

ई. दीपक वर्मा का कहना है की चीन के अड़ियल रवैये के चलते ही नुक्लेअर सप्पलीएर्स ग्रुप (NSG ) में भारत की एंट्री का रुकावट हो रहा है । चीन जहाँ आतंकवाद का केंद्र पाकिस्तान  का साथ दे रहा है वही भारत से आर्थिक सहायता व्यापर के रूप में ले रहा है । देश को शक्तिशाली बनाने और आतंकवाद से निपटने के लिए चीन का सामान का बहिष्कार आवश्यक हो गया है । इसके लिए सभी देशवासियो को संकल्प लेना ही होगा ।koshixpress

बिनोद ठाकुर कहते हैं कि चीन निर्मित सामान लोगों के बीच गहरी पैठ बना रही है जिस कारण आने वाले दिनों में हमारे भारतीय कंपनी एवं व्यपारी को चीन के व्यपारी के साथ ही काम करने को मजबूर होना पड़ेगा जो कि हमारे आर्थिक एवं व्यपारिक आजादी को समाप्त कर देगा ।

शिक्षक सह समाजसेवी विवेक यादव कहते हैं कि लोगों को अपनी अवधारणा बदलनी होगी कि किस तरह हम चीन निर्मित सामान पर निर्भर होते जा रहे हैं और खुद कि कमी के कारण चीन को अपने देश में बड़ा बाजार बनाने का मौका दे रहे हैं ।हमलोगों को चाहिए कि स्वदेशी सामान अपनाएं और देश को सुदृढ बनाएं ।अगर ऐसा नहीं कर सकते तो बंद कर दीजिए गांधी को बापू मानना , क्योकि एक तरफ उनको राष्ट्रपिता मान रहे हैं और दूसरी तरफ उनके बताएं गए राह पर नहीं चल रहे हैं । गांधी जी द्वारा चरखा आंदोलन का एकमात्र उदेश्य था स्वदेशी सामानों के उपर लोगों को जागरूक करना ।

रमेश साह का मानना है कि अगर बाजार में लोगों के द्वारा चीन निर्मित सामान की मांग होगी तो व्यवसायी को मजबूरन।चीन निर्मित सामान मंगाना ही पड़ेगा और बेचना ही पड़ेगा इसलिए सर्वप्रथम लोगों को चीनी सामानों से मोहभंग करना पड़ेगा ।

डिजिटल प्रेस संचालक जीवन कुमार का कहना है कि बूंद बूंद से घड़ा भरता है , सभी को जागृत होना होगा कि दूसरा कोई चीनी सामानों का विरोध करता हो या ना हो मैं तो करूंगा , उसके बाद देखिए धीरे धीरे लोगों की संख्या बढती जाएगी ।आप शुरुआत तो कीजिए ।

रिपोर्ट- रिप्पु वर्मा