टूट रहा बच्चों का गुल्लक,नहीं घट रही परेशानी,छोटे नोटों की है किल्लत !

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koshixpressखगड़िया/परबत्ता (मुकेश कुमार मिश्र) : प्रखंड के सभी बैंकों में सूर्योदय के साथ ही नये नोटों के लिये संघर्ष शुरु हो जाता है।प्रखंड में छोटे और मंझौंले नोटों के लिये मारा मारी का दौर जारी है।इस क्रम में पहले अधिकाश घरों के पुरुषों की जेबें खाली हो गयी।बाद में महिलाओं के द्वारा बचत कर रखी गयी राशि से कुछ दिन घर का काम चलाया गया।अब छोटे बच्चों ने भी इसमें अपना योगदान देना शुरु कर दिया है।इसमें बच्चों के द्वारा घर में गुल्लक में काफी दिनों से रखे विभिन्न मूल्य के सिक्के भी अब उपयोगी साबित हो रहे हैं।
बिशौनी निवासी अनुभव कश्यप ने जब घर में बड़े नोटों के रहते हुए छोटे नोटों के लिये घरवालों को परेशान देखा तो परिवार की परेशानी को हल करने के उद्येश्य से गुल्लक में रखी राशि को निकालकर प्रस्तुत कर दिया जो सात सौ रुपये के थे।बहरहाल छोटे नोटों की समस्या के इस अस्थायी हल ने तो अगले कुछ दिनों के लिये राहत जरुर कर दिया। लेकिन बच्चे को क्या पता कि यह ऊँट के मुँह में जीरा साबित होगा।