ईंटउघनी : कथित सामाजिक व्यवस्था में स्त्रियां शोषण व उपभोग की वस्तु बन कर रह गयी !

3858

सहरसा : साहित्यकार डॉ मनोरंजन झा के 70 वें जयंती समारोह के अवसर पर सुपर बाज़ार अवस्थित कला भवन के सभागार में पंचकोसी सांस्कृतिक मंच द्वारा दो दिवसीय नाट्य महोत्सव के पहले दिन पंचकोसी सहरसा के द्वारा प्रस्तुत एकांकी नाटक ईंटउघनी ने दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी |नारी शोषण पर केंद्रित इस नाटक में ईंट भट्ठे पर जिंदगी बिताते मजदूर व उनके परिवार के शोषण की कहानी है| नाटक की परिकल्पना व निर्देशन का भार उठाने वाले अमित जयजय कहते हैं कि आज की तथा कथित सामाजिक व्यवस्था में स्त्रियां शोषण व उपभोग की वस्तु बन कर रह गयी है |koshixpress

तथाकथित लोगों की घूरती आंखें, लपलपाती जिह्वा से लार टपकाते सभ्य लोग आज के इस आधुनिक युग में भी प्रतिष्ठा का चोला पहनकर हर जगह मौजूद है| जहां पर स्त्रियां विज्ञापन के लिए नंगी खड़ी मिल जायेगी |किसी के साथ अपना सर्वस्व दांव पर लगाकर तो कहीं अपने जीवन के लिए, वजह सिर्फ पापी पेट. इस नाटक में इसी को दिखाया गया है|नारी की त्रासदी का किया चित्रण मैथिली भाषा के साहित्यकार स्व मनोरंजन झा साहित्य क्षेत्र का जाना माना नाम है. नारी शोषण पर उन्होंने मैथिली में एक काव्य की रचना की थी. जिसे रूपांतरण कर नाटक का रूप दिया गया|koshixpress

ईंटउघनी नाटक के माध्यम से उन तमाम महिलाओं की प्रतीकात्मक प्रस्तुति दी गयी है, जो घर से काम करने के लिए बाहर निकलती है| आधुनिक युग में जब हम आप एसी व पंखा में आराम फरमाते हैं तो दूसरी ओर स्त्रियां पापी पेट के लिए चिलचिलाती धूप में, ठिठुरती ठंड में, भारी बरसात में हर जगह भागती, अपनी इज्जत बचाती, कहीं बलात्कार तो कहीं शोषण तो कहीं मौत के घाट उतार दी जाती है. फिर भी स्त्रियां मौन है|अपने श्रम पथ पर समय की प्रतीक्षा में लाज बचाने की इच्छा में अपना भाग्य गढ़ रही है|नाटक को अपने हाव भाव से जीवंत प्रस्तुति देने पर देर तक कला भवन के सभागार में तालियां बजती रही|नाटक देख रहे लोगों के सामने कलाकारों ने समाज की इस सच्चाई को बखूबी परोसा|koshixpress

संस्था के सचिव व टीम लीडर अभय कुमार के नेतृत्व में लाइट अमित कुमार जयजय,सेट निर्माण विकास भारती, मंच सज्जा अमित कुमार अंशु,मिथुन कुमार गुप्ता सहित सुधांशु शेखर व अन्य ने अपनी भूमिका निभाई |koshixpress