कला अभिव्यक्ति है इसे किसी सीमा में नहीं बांधा जा सकता – सुमन

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कविता पाठ करते सुमन

सहरसा :कला अभिव्यक्ति होती है, इसे किसी सीमा में नहीं बांधना चाहिए। उक्त बातें शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान की साहित्यिक इकाई समकालीन हिन्दी कविता/पोएट्री प्वाइंट द्वारा शनिवार को महाबोधि बीएड कॉलेज नालंदा के प्राध्यापक सह ग़ज़लकार एवं युवा कवि अंजनी कुमार सुमन के सम्मान में आयोजित ‘मंजूषा कला परिचय और विकास’ विषयक व्याख्यान में उन्होंने कही।

सुमन को सम्मानित करते संस्थान के सचिव
 सुमन को सम्मानित करते संस्थान के सचिव

श्री सुमन ने कहा कि मंजूषा कला अंग प्रदेश की महत्तवपूर्ण लोक कला है। जो प्राचीन तो रही है पर उपेक्षित सी रही है। लेकिन पिछले दशकों से मंजूषा की पहचान देश स्तर पर बनी है और सरकार की ओर से भी इसको प्रोत्साहन मिलता जा रहा है। मिथिला क्षेत्र के नव कलाकारों को भी मिथिला की कला के साथ-साथ मंजूषा कला को भी सीखने व पहचानने की बात कही।

अपने काव्य पाठ में उन्होंने आते-जाते आना-जाना जान गये, हम तेरे दिल का तहखाना जान गये… कोई नाचता है सुमन शौक से कब, कलाकार को बस नचाती है रोटी… गया है घाव जो देकर वही आकर मिटाएगा, यही सब सोच कर उसपर कभी मरहम नहीं करते… जैसे कविताओं से उपस्थित लोगों को भाव विभोर कर दिये।

कविता पाठ करते सुमन
 कविता पाठ करते सुमन

समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार व संस्थान के संरक्षक डॉ. अरविन्द श्रीवास्तव ने की। इससे पूर्व संस्थान के सचिव वन्दन वर्मा ने श्री सुमन को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया। मौके पर रंगकर्मी कुन्दन वर्मा, साकेत कुमार, रोहित कुमार, मीनाक्षी, अर्चना, राजा, अरूण परासर, अनुष्का, दिब्यांश, अग्रीमा, प्राप्ति आदि मौजूद थे।