शहद के सेवन से मनुष्य निरोगी,बलमान ओर दीर्घायु बना रहता है !

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शहद अदरक रस मिलाकर, चाटे परम चतुर।श्वास, सर्दी, वेदना, निश्चित होए दूर।

शहद प्रकृति की देन है। भारत में प्राचीन काल से शहद एक उत्तम खाद्य माना जाता है। उसके सेवन से मनुष्य निरोगी, बलवान और दीर्घायु बनता है।विविध प्रकार के फूलों में से मीठा रस चूसकर मधुमक्खियाँ अपने में संचित करती हैं। शहद की तुलना में यह रस पहले तो पतला और फीका होता है परंतु मधुमक्खियों के शरीर में संचित होने पर गाढ़ा और मीठा हो जाता है। फिर शहद के छत्ते में ज्यादा गढ़ा बनकर शहद के रूप में तैयार होता है। इस प्रकार शहद अलग-अलग फूलों के पराग, वनस्पतियों और मधुमक्खियों के जीवन के सार तत्त्व का सम्मिश्रण है। शहद केवल औषधि ही नहीं, बल्कि दूध की तरह मधुर और पौष्टिक, सम्पूर्ण आहार भी है।शहद में स्थित लौह तत्त्व रक्त के लालकणों में वृद्धि करता है। शहद गर्मी और शक्ति प्रदान करता है।koshixpress

शहद श्वास, हिचकी आदि श्वसनतंत्र के रोगों में हितकर

शहद में विटामिन बी का प्रमाण ज्यादा होता है जिससे उसका सेवन करने से दाह, खुजली, फुँसियाँ जैसे त्वचा के सामान्य रोगों की शिकायत नहीं रहती। अतः इन रोगों के निवारणार्थ 4-5 महीनों तक रोज प्रातः 20-20 ग्राम शहद ठण्डे पानी में मिलाकर पीना चाहिए। पतला साफ कपड़ा शहद में डुबाकर जले हुए भाग पर रखने चाहिए। पतला साफ कपड़ा शहद में डुबाकर जले हुए भाग पर रखने से खूब राहत मिलती है। शहद को जिस औषधि के साथ मिलाया जाता है उस औषधि के गुण को यह बढ़ा देता है।शहद गरम चीजों के साथ नहीं खाना चाहिए एवं उसे शहद खाने के बाद गरम पानी भी नहीं पिया जा सकता क्योंकि उष्णता मिलने पर वह विकृत हो जाता है।

एक वर्ष के बाद शहद पुराना माना जाता है। शहद जैसे-जैसे पुराना होता है वैसे-वैसे गुणकारी बनता है। शहद की सेवन-मात्रा 20 से 30 ग्राम है। बालकों को 10-15 ग्राम से और व्यस्कों को 40-50 ग्राम से ज्यादा शहद एक साथ नहीं लेना चाहिए। शहद का अजीर्ण अत्यंत हानिकारक है। शहद के दुष्परिणाम कच्ची धनिया और अनार खाने से मिटते है।

  • 1 चम्मच शहद, 1 चम्मच अरडूसी के पत्तों के रस और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर पीने से खाँसी मिटती है।
  • शहद के साथ पानी मिलाकर उसके कुल्ले करने से बढ़े हुए टॉन्सिल्स में बहुत राहत मिलती है।

शहद की कसौटी कैसे करें  ?

शहद में गिरी हुई मक्खी यदि उसमें से बाहर निकल आये और थोड़ी देर में उड़ सके तो जानना चाहिए कि शहद शुद्ध है। शुद्ध शहद को कुत्ते नहीं खाते। शुद्ध शहद लगाये हुए खाद्य पदार्थ को कुत्ते छोड़ देते हैं। शुद्ध शहद की बूँद पानी में डालने से तली पर बैठ जाती है। शहद में रूई की बाती डुबाकर दीपक जलाने से आवाज किये बिना जले तो शहद शुद्ध मानना चाहिए। बाजार में शहद की अमुक चिह्न की (कंपनी की) भरी शीशी मिलती है, उसे कृत्रिम शहद माना जा सकता है। कृत्रिम शहद बनाने के लिए चीनी की चाशनी के टेंकर को 6 महीने तक जमीन में दबाकर रखा जाता है और उसमें से बनाया हुआ कृत्रिम शहद प्रयोगशाला में भी पास हो सकता है। दूसरे प्रकार से भी कृत्रिम शहद बनाया जाता है। आजकल ज्यादा प्रमाण में कृत्रिम शहद ही मिलता है।