सूर्या हॉस्पिटल की कहानी मरीज के परिजन के जुबानी !

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सहरसा : निजी नर्सिंग होम में मरीजों का किस तरह शोषण किया जाता है इसका सबसे ताजा उदाहरण सहरसा का सबसे चर्चित नर्सिंग होम सुर्या हॉस्पिटल का है |जहां से एम्बुलेंस के जरिए मरीज को बेहतर ईलाज के लिए भेजा जाता है मगर रास्ते में उस में क्या सुबिधा असुविधा है यह मरीज के परिजन खुद बता रहे है …….पढ़िये भुक्तभोगी परिजन की जुबानी |

सत्य प्रकाश ने फेसबुक पर लिखा है |
सत्य प्रकाश ने फेसबुक पर लिखा है |

मरीज के परिजन सत्य प्रकाश ने अपने फेसबुक टाइम लाइन पर क्या लिखा है …………….

सत्य प्रकाश लिखते हैसूर्या अस्पताल की वास्तविकता यह है कि मै दिनांक १८.११.२०१६ को करीब १० बजे सुबह मधेपुरा से इस अस्पताल आये एवं एन.आई.सी. यू. में डॉ. ने भर्ती किया . ५-६ घंटा रखने के बाद करीब २ बजे दिन में बोला गया की नवजात बच्चे का हालत ठीक नहीं है पटना रेफेर करना पड़ेगा. वहां का बिल भुगतान करने के बाद सूर्या अस्पताल के द्वारा एम्बुलेंस की व्यवस्था की गयी. जिसका शुल्क २०,००० बताया गया. आग्रह करने पर १६,००० लिया गया. उस एम्बुलेंस में न ए.सी. चल रही थी न वेंटीलेटर की व्यवस्था थी. सिर्फ एक स्टाफ के साथ पटना भेज दिया गया. जब हम बोलते थे की बच्चा को जब आप लोग एन.आई.सी. यू. में ए. सी. में रखे तो एम्बुलेंस में ए. सी. क्यों नहीं चला रहे है लेकिन वास्तविकता यह थी की एम्बुलेंस का ए. सी. ख़राब थी. उस स्टाफ के अनुसार दरभंगा के आस-पास बच्चा का हालत बिगड़ने लगा एवं उन्ही के स्टाफ के द्वारा दरभंगा में ही आर.बी. मेमोरियल अस्पताल में भर्ती किया गया एवं काफी मिन्नत के बाद लगभग १-२ घंटा रुकने के बाद एम्बुलेंस चला गया. दरभंगा में ४-५ घंटा रखने के बाद बच्चा को मृत घोषित कर दिया गया”

इस खबर के आने से पहले सूर्या हॉस्पिटल के प्रबंधक सह चिकित्सक डॉ० विजय शंकर ने www.koshixpress.com के व्हाट्स अप्प्स ग्रुप में क्या लिखे इसे भी पढ़े ….

डॉ विजय शंकर ने लिखा है कि [7:41 AM, 11/24/2016] Dr Vijay Shankar Surya: कुणाल जी,सिर्फएक पहलू को देखकर रिपोर्टिंग करना कहॉ तक न्यायसंगत है।जिस एेमबुलेंस की बात कर रहे है वो वेन्टिलेटर व अन्य यंत्र से युक्त आसीयू आन ह्वील है जिसका भाड़ा पटना के लिए २०००० पड़ता हैै,इस तरह का एेमबुलेंस पहले पटना से मंगाना पड़ता था जिसका भाड़ा २० हजार से काफी ज्यादा होता था।

डॉ० क्या लिखते है इसे भी भी पढ़े
  डॉ० क्या लिखते है इसे भी भी पढ़े

फिर डॉ विजय शंकर पुनः 40 मिनट बाद क्या लिखते है खुद पढ़े 
[8:20 AM, 11/24/2016] Dr Vijay Shankar Surya: अब रही बात इस मरीज की तब मै बता दू एक नवजात बच्चा मधेपुरा सदर अस्पताल मे जन्म लिया,बच्चा को सांस की तकलीफ हुई तोउसे मधेपुरा मे भर्ती कराया गया,हालत बिगड़ने पर सूर्या आसीयू मे भर्ती कराया गया,शिशु रोग विशेषग्य ने देखऩे के बाद पाया किउस बच्चा को बेहतर इलाज के लिए पटना या अन्य अच्छे जगह से जाना चाहिए,।परिजन द्वारा ऐमबुलेंस बुक किया गया,जिसमे जितना संभव हो पाया रियायत किया गया,जब ऐमबुलेंस झंझाड़पुर के आस पास था,तब नवजात की हालत काफी बिगड़ने लगी,तब उसे बहुत मुश्किल से दरभंगा तक पहुचाया गया एवं एक अस्पताल मे भर्ती कराया गया।ऐमबुलेंस का टीम वही रूका रही कि हालत मे सुधार होने पर पटना पहुचा दिया जाएगा,।४ _५घंटे बाद ऐमबुलेंस के टीम को बताया गया कि वे लोग दरभंगा मे ही इलाज करायेगे,आप लोग जाइये,अौर वे लोग ऐमबुलेंस लेकर चले आए।अब आप बताए कि हास्पीटल के द्वारा क्या गलती किया गया?आप ग्रुप एडमीन है आपको हर पहलू को देखना होगा, one sidedरहेगे को group बनाने का कुछ भी अौचित्य वही रह जाएगा |
Thank you

शायद चर्चित साहित्यकार डॉ० मनोरंजन झा ने लिखा थाआज मिलावट से होती,नित नई बीमारी | पों-बारह डॉक्टर का है,खुश हैं व्यापारी || डॉक्टर जी अब न कहते कि सीजन डल है| आते बहुत मरीज,अब फिर चहल-पहल है ||दवा-कम्पनी देती है अब,डॉक्टर को उपहार | फ्रीज और बिजली पंखा संग,चमचम मोटर कार || कार के संग में दौर रही हैं,नकली सभी दवाई |न जाने इस तरह आज क्यों,करते लोग कमाई ||अस्पताल में कहीं दवा न टिंचर-पट्टी |जीवन-स्थल आज बना,देखो मरघट्टी