बेच दी करोड़ो की सरकारी जमीन !

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सहरसा/सिमरी बख्तियारपुर : जब से नगर पंचायत सिमरी बख्तियारपुर सहित पुरे अनुमंडल क्षेत्र की जमीन का दाम सोने से महंगा हुआ है तभी से यहां भूमाफिया स्थानिय प्रशासन से सांठगांठ बिठा कर सरकारी जमीन को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। लेकिन अपने आमजन मुंह नही खोलता था मुंह खोलता भी तो किसके पास सभी कि मिलीभगत जो सामिल रहती थी उपर से लक्ष्मी की कृपा से सब का मुंह बंद कर दी जाती रही थी।

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  • पहली बार सत्तारूढ़ दल के नेता ने अपने ही प्रशासन पर आरोप लगा फैलाई सनसनी
  • भूमाफियाओं ने अंचल प्रशासन व पुलिस की मिलीभगत से बेच दी करोड़ो की सरकारी जमीन
  • सत्तारूढ़ दल के जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र भेज उच्चस्तरीय जांच की मांग

पहली बार सत्तारूढ़ दल के राजद जिलाध्यक्ष जफर आलम ने सरकारी जमीन को स्थानिय प्रशासन के मिलीभगत से बेचने की बात कह क्षेत्र में सनसनी फैला दी जो अब चर्चा का विषय बन गया हैं। उन्होने सीधे मुख्यमंत्री को पत्र भेज कर एक उच्चस्तरीय जांच टीम से इसकी जांच करने री मांग की है।koshixpress

बहुचर्चित खाता 391 

यहां की दर्जनों सरकारी जमीन भूमाफियाओं ने बेच दी लेकिन आमजनों को जानकारी तक नही हुआ लेकिन जब बहुचर्चित खाता 391 खेसरा 1070 रकवा 1 बीधा 5 कट्ठा 4 धूर जो बख्तियारपुर थाना के ठीक बगल में पड़ती जमीन को भूमाफियाओ ने हाथ लगाया तो पानी सर से उपर हो गया। भूमाफियाओं ने इस जमीन को लाखों में खरीद कर करोड़ों में जब बेचना शुरू किया तो लोगों को लगा की ये तो अंतिम बात हो गई। क्योकि वर्षो से यह जमीन यू ही पड़ती खाली पड़ा था बच्चे मैदान में खेलते रहते थे एकाएक यह जमीन रैयती हो गया यह लोगो को समझ से उपर हो गया ।

इस जमीन पर तीन मुकदमा हो चुका दर्ज 

जब से भूमाफियाओं ने इस जमीन को बेचना शुरू किया तब से अबतक तीन केश विभिन्न लोगों ने दर्ज करवा रखा है जो जांच की प्रक्रिया में चल रहा है। एक मामले में पुलिस अधीक्षक सहरसा ने स्वय अपने से जमीन को देखा व आवश्यक पुछताछ किये।

क्या है गैरमजरूआ आम व खास जमीन

देश आजादी के बाद जब जमींदारी प्रथा का अंत होने लगा तो सरकार ने सभी जमींदारों को रैयतो के बीच जमीन वितरण करने का आदेश दिया गया। जमीन का वितरण विभिन्न प्रकार से करने के बाद जो जमीन बच गई वह जमीन गैरमजरूआ आम एवं गैरमजरूआ खास की श्रेणी में रखा गया।नाम के अनुरूप ही आम जमीन आमलोगों के उपयोग में चला आ रहा वही गैरमजरूआ खास जमीन को समय समय पर शक्तिप्रदत पदाधिकारीयों के द्वारा जरूरत मंद लोगो के बीच बन्दोबस्त किया जाता रहा है।

114 वर्ष पूर्व हुऐ सर्वे पर ही हो रहा कार्य 14642367_992177607561116_7079490312251137469_n

सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल के सलखुआ व बनमा-ईटहरी प्रखंड को छोड़कर इस अंचल के कुछ पंचायतों को अपवाद में रहने दे तो अभी भी नगर पंचायत व आसपास के पंचायतों की जमीन की नापी व खरीद बिक्री 114 वर्ष पूर्व यानि सन 1902 ई० में हुऐं भूमि सर्वे पर ही अभी भी सभी कार्य किये जाते है। यही बात जमीन से जुड़े समस्या का जड़ बन गया है ऐसा नही है कि सर्वे नही हुआ नया सर्वे कार्य को लगभग 30 से 40 वर्ष बीत गया है लेकिन कुछ अरचनों की वजह से यह सर्वे नोट फाईनल की श्रेणी में फाईलों की शोभा बढ़ा रही है इस ओर कोई ध्यान नही दे रहा है।

कौन थे यहां के जमींदार,क्या है पेंच

आप को जानकर बड़ी हैरानी होगी की यहां के जमींदार कोई ओर नही बल्की जिनको यहां के आमजन वर्षो से अपना जनप्रतिनिधी चुनते है उन्हीं के दादा यहां के जमींदार हुआ करते थें। जानकार बताते है की ईनकी जमींदारी करीब 75 हजार रूपये प्रति वर्ष की थी। समय के साथ उन्होने अपने क्षेत्राधिकार की जमीन नियमानुसार वितरण कर सभी कागजात सरकार के कार्यालय को सर्मपित कर दी । वर्तमान समय में सरकारी कार्यालय की स्थिती यह है की महत्वपूर्ण कागजात गायब या यू कहें की गायब कर दी गई है ही नही। जिसकी वजह से जमीन संबंधी समस्या दिन ब दिन बिकराल रूप ले रही है। यहा के जमींदार के वंशज व यहा के जनप्रतिनिधी होने के नाते वर्तमान सांसद चौधरी महबूब अली केसर को चाहिये की अपने स्तर से यहां की समस्या का हल सरकारी स्तर या फिर अपने स्तर से करवाने का काम करें।