सोशल मीडिया पर ही याद आते है कालजयी रचनाओं के रचियता राजकमल !

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एक व्यक्ति जो मैथिलि,हिन्दी,बंग्ला और अंग्रेजी में अनेक कालजयी रचनाओं का रचियता रहा |जिसने साहित्य में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति पायी और हमारी मिट्टी का सौभाग्य कि वह हमारी जमीन का उपज थे |इस महान कवि,कथाकार,उपन्यासकार,प्रगतिवाद के अभिन्न अंग राजकमल की 87 वीं जयंती पर किसी अख़बार या संगठन ने कुछ भी करना मुनासिब नही समझा | अपनी थाती के प्रति सहरसा और बिहार की उपेक्षा ही बताती है कि हम सब कैसे हो गए |जिन्हें अपने नायकों की खोज खबर नही रहती |जीवन भर व्यवस्था और रूढ़ीवाद के खिलाफ लड़ने और लिखते रहने वाले इस करुणा के कवि का शायद कोई प्रशंसक,अनुयायी या उतराधिकारी सचेष्ट नही रहा |सुनते है राजकमल की समीक्षा,प्रकाशन,कीर्तन करके कई लोग आम से खास हो गये पर राजकमल अभी भी मुक्ति प्रसंग के पास ही रखे गये |कहाँ एक और पूर्णिया में रेणु,बेगूसराय में दिनकर पर्याय बनते है और कहाँ स्वजनों की उपेक्षा से यह बहुआयामी व्यक्तित्व हाशिये से भी मिटाया जा रहा है |धिक्कार है ………..


koshixpressसोशल मीडिया के हवाले से :

हालाँकि राजकमल चौधरी जी के पैतृक गांव महिषी में नवनिर्मित पुस्तकालय में राजकमल जयन्ती मनाया गया |वही रमेश झा महिला कॉलेज के प्रो० सह पत्रकार,ब्लोगर और राजकमल चौधरी के परिजन डॉ बशिकांत चौधरी जी ने अपने ब्लॉग के माध्यम से श्रधांजलि अर्पित की है (पूरी पोस्ट पढने के लिए क्लिक करे  http://bashikantchoudharykoshi.in/blog/a-critical-tribute-to-a-rebel-poet ) |

वरीय पत्रकार पुष्यमित्र ने अपने फेसबुक पर उनको याद करते हुए राजकमल चौधरी का पांडुलिपि की तस्वीर पोस्ट किए है (जो सबसे पहले प्रोफेसर देवशंकर नवीन व पुष्यमित्र जी के प्रयास से वर्ष 2000 में इंडिया टुडे के साहित्य वार्षिकी में प्रकाशित हुआ था )

पुष्यमित्र जी लिखते है अच्छी कलम, अच्छी चाय और एलेन गिन्सबर्ग की कविताओं के शौकीन. हिंदी साहित्य में धूमकेतु की तरह अवतरित होने और उथल-पुथल मचा कर महज 38 साल की उम्र में दुनिया को विदा कह देने वाले राजकमल चौधरी, मेरे मामा की आज जयंती है. उन्हें नमन 
निलेश दीपक ने अपने वाल पर याद करते हुए लिखते है : आज मेरे प्रिय कथाकार राजकमल चौधरी का जन्म दिन है। उन्हें स्मरण करते हुए नमन करता हूँ। इसी साल के शुरुआत में हमने उनकी कहानी ‘शवयात्रा’ का मंचन किया था। हमलोग अगले वर्ष के प्रारम्भ में ही राजकमल की कहानी ‘मलाह टोल एक चित्र’ का नाट्य मंचन बिहार के लोकनाट्य ‘नाच’ शैली में प्रस्तुत कर रहे हैं। यानी ‘नाच’ करूँगा। आप सबसे सहयोग चाहिए, सभी रूपों में – तन मन धन से। राजकमल चौधरी को विनम्र श्रद्धांजलि।
अपने पिता को याद करते हुए नीलमाधव चौधरी लिखते है :तेरह दिसम्बर यानी आपका जन्म दिन | बचपन से लेकर अब तक इस तारीख को मेरी कलम कुछ पंक्तियाँ लिखने को कुलबुलाने लगती है | जानता हूँ ना तो मेरे पास काबिलियत है,और ना ही इस प्रकार का अध्ययन की आपके क्या, किसी के भी व्यक्तित्व कि साहित्य पर कुछ लीखूँ | पर दिल मानता कहाँ, फिर जबसे आपकी रचनावली प्रकाशित हुई और आपके लेख, पत्र, डायरी को पढने का अवसर मिला है, लिखने पढने की ओर पुन: ध्यान जाने लगा है, कुछ ना कुछ लिखता ही रहा हूँ | अभी सप्ताह भर पहले गाँव से अमित जी (अमित आनंद) का फोन आया था…(पूरी पोस्ट पढने के लिए क्लिक करे http://www.facebook.com/neelmadhavchaudhary/posts/939633472804861 )koshixpress
महिषी निवासी सह पत्रकार रमण ठाकुर ने राजकमल चौधरी को याद करते हुए अपने फेसबुक पेज पर लिखा है : अल्पायु में अपनी लेखनी के बदौलत अमिट छाप छोड़ने वाले राजकमल चौधरी की आज 87 वीं जयंती है। जगह जगह उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया जायेगा। उनकी तस्वीर को रख लोग फ़ोटो खिंचवायेंगें। मगर असली श्रधांजलि उन्हें सहरसा के डीएम विनोद सिंह गुंजियाल ने दिया है जिन्होंने सरकार को प्रस्ताव भेजा है कि महिषी स्थित क्रीड़ा मैदान को राजकमल स्टेडियम का रूप और नाम दिया जाये। जो काम आज तक किसी डीएम ने नहीं किया वह विनोद सिंह गुंजियाल ने कर दिखाया। तमाम साहित्य प्रेमी इस नेक और दरियादिली के लिए श्री गुंजियाल का शुक्रगुजार रहेंगे। वैसे जानकारी के मुताबिक बेगुसराय जिले में दिनकर जी के नाम पर एक स्टेडियम है। अगर सरकार की हरी झंडी मिल गयी तो महिषी का राजकमल स्टेडियम किसी साहित्यकार के नाम पर बनने वाला राज्य का दूसरा स्टेडियम होगा। महिषी स्थित क्रीड़ा मैदान में हरेक वर्ष राज्य सरकार द्वारा आयोजित उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया जाता है। अगर यहाँ स्टेडियम बना तो महोत्सव की भव्यता में चार चाँद लग जायेगा। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार डीएम के प्रस्ताव पर शीघ्र ही हरी झंडी देगी। यही राजकमल जी होगी सही श्रधांजलि।
पेशे से शिक्षक एवं साहित्य में अभिरुचि रखने वाले शेलेन्द्र शैली लिखते है : आज राजकमल का जन्मदिवस है।होते तो छियासी साल के हुए होते आज।आश्चर्य है जनपक्षधरता का दावा करने वाले स्थानीय अखबार में एक भी शब्द उनके लिये नहीं लिखा गया है और ना ही शहर के किसी भी संस्था ने इसे कोई जगह देने की जरुरत महसूस किया है आज।भाट नेटुआ को युगपुरुष बना कर महिमामंडित करने वालों को तो गिनना भी बेकार है पर राजकमल के तथाकथित वरदशिष्यों को भी आज की सुधि नहीं रही।ओह।।।पर मेरे मित्र राजकमल कोई चिंता दुख कष्ट या क्षोभ नहीं करना है।मैं हूँ ना।चलो मनाते हैं तेरा हैप्पी वाला बर्थडे।Happy birthday Rajkamal.luv you dost….
अरे ये तो तुम्हें भी मालूम था ही कि ये केकड़ों का झुंड कितना संवेदनशील है तो फिर लगाओ ठहाके हा हा हा।हहा हहा हहा।।।व्यवस्था अभी भी वैसी ही है मित्र जैसी तुम उनचास वर्ष पहले छोडकर मुक्त हुए थे।।।तो चलते तो रहना ही है।देखो सपोर्ट करते रहना क्योंकि तेरा वाला जिगरा अब बनता नहीं ना।।।।नमन।।।
राजकमल चौधरी जी के जयन्ती पर अलग-अलग पोस्ट को संजोने का काम कर रहे महिषी के युवा अमित आनंद का संयोजन ही है की यह रिपोर्ट बन सका |