नये आरक्षण रोस्टर पर सियासी घामासान शुरू !

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पार्षदों ने कार्यपालक पर लगाया दुर्भावना से प्रेरित हो कार्य करने का आरोप 
सहरसा/सिमरी बख्तियारपुर : नगर पंचायत का चुनाव हुये यू तो एक पंचवर्षीय ही होने वाला है लेकिन एक ही टर्म के कार्यकाल में यह नगर पंचायत किसी न किसी रूप में हमेशा चर्चा में बने रहता है।कभी कार्यपालक को बंधक बनाने को तो कभी अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव को यह हमेशा सुर्खिया बनती है । इस बार विवाद की वजह आरक्षण रोस्टर बनी है।

जानकारी मुताबिक सिमरी में आरक्षण रोस्टर बदलने को लेकर नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड पार्षदों के बीच काफी आक्रोश व्याप्त है। इसी मामले को वार्ड पार्षद सह जदयू नेता चन्द्रमणी भी कूद पड़े है और इस मामले को सहरसा जिलाधिकारी से लेकर राज्य निर्वाचन आयोग तक के दरवाजे खटखटाने की तैयारी किया जा रहा है।उन्होनें ने राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दुर्गेश नंदन के पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि आयोग के पत्र संख्या न.नि. 50/32/2016 पत्रांक 6837 में निर्देश है कि बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा 12/2 में राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2009 में संशोधन किये गये है और जिसके तहत आरक्षण में चक्रानुक्रम का सिद्धांत दो क्रमिक आम निर्वाचन चुनाव के पश्चात होना है|

जबकि, सिमरी बख्तियारपुर नगर पंचायत का पहला आम चुनाव वर्ष 2012 है। पार्षदों का कहना है कि नगर पंचायत ने गलत मंशा के तहत नगर पंचायत का आरक्षण रोस्टर परिवर्तित करने का प्रस्ताव वरीय अधिकारियो को भेजा है |इधर, इस सम्बन्ध में सिमरी बख्तियारपुर नप की कार्यपालक पदाधिकारी रीता कुमारी ने बताया कि राज्य चुनाव आयोग एवं वरीय अधिकारियो के निर्देश पर अनुमंडल में आरक्षण रोस्टर बनाया जा रहा है।