महापर्व छठ को लेकर सहरसा समेत पूरे कोसी के घर-घर में छठ के गीत गूंजने लगा !

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kx डेस्क : केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेडम्राय, आदित लिहो मोर अरगिया, दरस देखाव ए दीनानाथ, उगी है सुरुजदेव, हे छठी मइया तोहर महिमा अपार, काच ही बास के बहंगिया बहंगी लचकत जाय  सहित कई छठ गीतों का धमाल है। भक्ति गीतों से संपूर्ण क्षेत्र के लोग भक्ति रस की गंगा में डुबकी लगाने लगे हैं। गीतों में आधुनिकता अवश्य आ गई है, लेकिन इन गीतों की लोकप्रियता में तनिक भी कमी नहीं आई है।koshixpress

छठ पूजा के गीत घरों से लेकर बाजारों तक में गूंज रहे हैं। प्रसिद्ध गायक-गायिकाओं की सीडी,डीवीडी एवं कैसेट दुकानों में जोर शोर से बिक रही है। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अनेक भोजपुरी गायकों के नए-नए छठ गीत के कैसेट बाजार में बिक रहे हैं। छठ व्रत से जुड़े पुराने गीतों सहित नए गीतों को पसंद किया जा रहा है। इसे लेकर म्यूजिक सीडी विक्रेताओं की दुकानों में दीपावली के पहले से ही चहल-पहल दिख रही है।

बाजारों में इस बार भी शारदा सिन्हा,देवी,मालिनी अवस्थी,कल्पना, मनोज तिवारी,पवन सिंह, छैला बिहारी,अजीत कुमार अकेला,अनुराधा पौंडवाल सहित अन्य प्रमुख गायकों द्वारा गाये गीतों के कैसेट बिक रहे हैं या लोग गाना लोड करवा रहे है| बाजार में शारदा सिन्हा के गाए छठ गीतों का क्रेज अब भी कायम है। शारदा सिन्हा,अनुराधा पौंडवाल एवं कल्पना के गीतों के सीडी बिक रहे हैं।koshixpress

छठ पूजा के गीतों का अपना एक अलग बाजार और अपनी एक अलग छटा है। इस पावन पर्व के गीतों में भी इतनी आस्था है कि गीत बजते ही लोगों का सिर श्रद्धा से नव जाता है। छठ की शाम के अघ्र्यदान के दिन तक इसके कैसेटों की बिक्री होती है। श्रद्धालु पुराने गायकों के साथ-साथ नए गीतकारों को भी सुनना चाहते हैं। इस वर्ष कई नए-नए कलाकारों ने छठी माई के गीतों की सीडी बाजार में उतारा है, जिसकी लोगों में काफी मांग देखी जा रही है।koshixpress

छठ पूजा की तैयारियां लोगों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा से शुरू कर दी है। चारों ओर छठ पूजा के गूंज रहें सुमधुर गीतों से छठ पूजा का उत्साह छलक रहा है।प्रमंडलीय मुख्यालय सहरसा सहित कोसी छठी माई के गीतों से सुवासित और गुलजार हो उठा है। शहर में चारों तरफ छठी माई के गीतों की सीडी काफी श्रद्धा से बजाई जा रही है। शहर के मठ-मंदिरों में भी छठी माई के गीतों की सीडी से सुबह की शुरुआत हो गयी है। शहर के साथ ही पूरा ग्रामीण क्षेत्र छठ मइया के गीतों में डूब गया है। कहीं शारदा सिन्हा की आवाज रस बरसा रही है कि ‘मोर जिया जाएला महंगा मुंगेर’ तो कहीं देवी के सुर कानों में पर्व की महिमा बखान कर रही है कि ‘कांच ही बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए’,’मरबो रे सुगवा धनुष से, सुग्गा गिरे मुरुझाए’ से लेकर ‘दरसन दीन्ही अपार हे छठ मइया दरसन दीन्ही अपार’। छठ गीतों के बिना मानो पर्व में रंग ही नहीं आता है।

सूर्य की उपासना का पावन पर्व ‘छठ’ अपने धार्मिक, पारंपरिक और लोक महत्व के साथ ही लोकगीतों की वजह से भी जाना जाता है। घाटों पर ‘छठी मैया की जय, जल्दी-जल्दी उगी हे सूरज देव’, ‘कईली बरतिया तोहार हे छठी मैया’, ‘दर्शन दीहीं हे आदित देव’, ‘कौन दिन उगी छई हे दीनानाथ’, जैसे गीत सुनाई पड़ते हैं।

मंगल गीतों की ध्वनि से वातावरण श्रद्धा और भक्ति से गुंजायमान हो उठता है। इन गीतों की पारम्परिक धुन इतनी मधुर है कि जिसे भोजपुरी बोली समझ में न भी आती हो तो भी गीत सुंदर लगता है। यही कारण है कि इस पारम्परिक धुन का इस्तेमाल सैकड़ों गीतों में हुआ है।