ठंड से हलकान जनजीवन !

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मधेपुरा (संजय कुमार सुमन) : कोहरा और पछुवा हवा से पिछले चार दिनों से ठंड में वृद्धि हो गयी है. सड़कों पर आवाजाही और बाजार में चहल-पहल कम हो गयी है. घने कोहरे के कारण देर तक सूर्य का दर्शन नहीं हुआ|ऊपर से हाड़ कंपाने वाली हवा सूई की तरह चुभ रही थी. लोग बहुत जरूरी काम से ही घर से बाहर निकले. बाजारों में चहल-पहल काफी कम रही.बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल जाते देखे गये. कुछ चौक चौराहों पर स्थानीय लोगों द्वारा ही अलाव की व्यवस्था की गयी थी. चाय दुकानों पर लोग गरम-गरम चाय चुस्की लेते दिखे. कोहरे के कारण सड़क पर दोपहर तक वाहन रेंगते रहे. इधर अस्पताल के चिकित्सकों ने लोगों को ठंड से बच कर रहने की सलाह दी है. रात के बाद दिन का पारा लगातार नीचे लुढ़कता आ रहा है. बीते 24 घंटे में दिन का पारा साढ़े चार डिग्री सेल्सियस लुढ़क कर 18 डिग्री सेल्सियस पर आ पहुंचा. ठंड ने बीते 18 साल का रिकार्ड को ध्वस्त कर दिया है. 1998 के बाद पहली बार ऐसा है जब दिन का पारा 18 डिग्री सेल्सियस या इससे नीचे हुआ |koshixpress

इस बार जल्दी आ गयी ठंड

मौसम विभाग की माने तो साल 2015 के नवंबर माह में ठंड पड़ा ही नहीं था. इस बार तो अपेक्षा के विपरीत तीन सप्ताह पहले ही ठंड ने दस्तक दे दी. इस साल जो ठंड दिसंबर के अंतिम सप्ताह में पड़ना चाहिए था वह दिसंबर के शुरुआती सप्ताह में ही पड़ने लगा. मौसम वैज्ञानिक डॉ सुनील कुमार बताते हैं कि इस समय ठंड कश्मीर में हुई बर्फबारी के कारण व पछुआ हवाओं केे कारण है. मौसम के उतार-चढ़ाव को मौसम वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन के नजरिये से देख रहे हैं|

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण गरमी एवं ठंड भले ही कम दिन के लिए आ रहा है लेकिन जितने समय रह रहा है, रिकार्ड गरमी या ठंड के साथ रह रहा है|

चार डिग्री तक लुढ़का दिन का पारा

मौसम विभाग के अनुसार 15 दिसंबर तक ठंड ऐसे ही लोगों को सतायेगी. इसके बाद दिन का तापमान बढ़ने लगेगा| यह अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस को पार कर जायेगा. गुरुवार को अधिकतम तापमान साढ़े चार डिग्री सेल्सियस लुढ़क कर 18 डिग्री सेल्सियस पर आ गया |16 साल में सिर्फ तीन बार नौ या इससे नीचे रहा |

रात का तापमान

रात के तापमान की बात करें तो बुधवार को न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री सेल्सियस रहा. इससे पहले बीते 16 साल में रात का पारा सिर्फ तीन बार नौ या इससे नीचे के स्तर पर पहुंचा था. इससे पहले साल 2012 में 7.9 डिग्री सेल्सियस, वर्ष 2009 में 9.0 डिग्री सेल्सियस और अंतिम बार सन 2000 में 8.9 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा. वातावरण में नमी (आर्द्रता) 100 प्रतिशत रहा जबकि दिन भर 5.1 किमी प्रतिघंटे की औसत रफ्तार से उत्तर-पश्चिमी हवाएं बही. हालांकि दोपहर बाद ये हवा का रुख बदलकर पश्चिमी हो गया|koshixpress

गेहूं के लिए अमृत,आलू-सरसाें के किसान हो जाये सतर्क

माैसम वैज्ञानिक डॉ सुनील बताते है ये ठंड गेहूं की फसल के लिए अमृत साबित होगा तो लंबे समय तक टिकने पर ये ठंड आलू-सरसों की फसल के लिए कहर बन सकता है. ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे आलू व सरसों की फसल में सिंचाई न करें. गेंहू की बुआई के लिए यह समय बहुत ही अनुकूल है|

कंपा देनेवाली ठंड, दिन भर नहीं निकला सूरज

कुहासे के कारण घना अंधेरा छाया रहा । दिन में भी वाहन चालक लाइट जला कर अपनी वाहन चलाते दिखे। ठंड से ज्यादा असर बच्चो एवं बुढो पर देखा गया.हाड़ को कपा देने वाली इस ठंड में बच्चे स्कूल जाने को विवश है। कई बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल जाते हुए देखे गये। कई बच्चो से पूछने पर बताया गया कि स्कूल नही जाने पर सर जी नाम काट देते हैं। कई अभिभावकों ने कहा कि सभी जिले में ठंड की छुट्टी की घोषणा जिला पदाधिकरी ने कर दी ।मधेपुरा में अब तक नही किया गया है ।इस ठंड में बच्चे कैसे जायेंगे स्कूल एक सवाल है। उन्होने जिला पदाधिकरी से ठंड को देखते हुए छुट्टी करने की माँग की है।