कोसी का विद्यापति धाम और भोगेन्द्र शर्मा का समर्पण !

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बिहार के सहरसा में जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर उत्तर सत्तर कटैया प्रखंड के लक्ष्मीनियां गांव में भी एक विद्यापति धाम है |लक्ष्मीनियां गांव की ऐतिहासिकता भोगेन्द्र शर्मा की समर्पण को दर्शाता है |श्री शर्मा के त्याग और समर्पण ने ही कोसी के इस इलाके में मिथिला और मैथिली के अंतरद्वन्द में लोगों को इसकी भाषा समझाने में वे सफल रहे | साधारण परिवार में जन्में भोगेन्द्र शर्मा का जज़्बा ही उन्हें असाधारण व्यक्तित्व का धनी बना दिया |koshixpresskoshixpress

कोसी के इतिहास में पहला मंदिर और उसमें स्थापित कवि विद्यापति की प्रतिमा एवं मंदिर की नक्कासी से उनके कला कौशल तथा मिथिला व मैथली के प्रति उनका अनुराग झलकता है | वहां का मनोरम दृश्य लोगों को आकर्षित करता है | प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में विद्यापति पर्व समारोह के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान मिथिला की संस्कृति व परंपरा की झलक उस गांव के लोगों को देखने का मौका मिलता है | जो इस गांव को संस्कारित करने में मिल का पत्थर साबित हो रहा है | इस गांव की सबसे बड़ी खासियत है कि यहाँ के 90 प्रतिशत जनता इसके सुधी श्रोता है | इस नेक कार्य के लिए ग्रामीणों का भी सहयोग उन्हें मिल रहा है |

ग्रामीणों के अनुसार इस धाम को पर्यटन के मानचित्र पर शामिल करने हेतु पर्यटन विभाग,बिहार सरकार द्वारा कवायद शुरू कर दी गयी है | सिमित संसाधन व आर्थिक संकट के बावजूद भी कभी अपने हौसला को इन्होंने कम नहीं होने दिया | एक बार पुनः इस स्थल को मनोरम बनाने के लिए कलाकार मित्र भोगेन्द्र शर्मा की कलात्मकता को सलाम…

(रिपोर्टपत्रकार सह रंगकर्मी बंधन कुमार वर्मा )