दर्जनों मुठभेड़ो का गवाह है कोशी दियारा !

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फाइल तस्वीर

6 गिरोहों का अब तक हो चुका है खात्मा 

ब्रजेश भारती की खास रपट

बिहार के दियारा इलाके में अपराधियों का समांतर सत्ता वर्षो से चला आ रहा है | खगड़िया-सहरसा जिले के सीमा क्षेत्र से लगे कोशी दियारा के फरकिया क्षेत्र में कई अपराधी गिरोह का सफाया एसटीएफ ने अब तक किया है। कोशी दियारा कि घरती बीते कई सालों से गोलियों की गुंज से थर्रा चुकी हैं हलांकि बीच-बीच में एसटीएफ की कार्यवाही से दियारा क्षेत्र मे शांति को बढावा मिला हैं। वर्ष 2015 में रामपुकार यादव गिरोह के अंतिम पीढी विपीन यादव व दिनेश यादव सहित कुल सात अपराधीयों को भाड़ी मात्रा में हथियार व कारतूस के साथ पटना से पहुंची एसटीएफ ने गिरफ्तार जेल भेज दिया था। करीब एक वर्ष बाद शुक्रवार की अहले सुबह एसटीएफ की ओर से कि गई एक ओर कार्यवाही से कोशी दियारा में शांति की उम्मीद जगी हैं।

आराम करते STF जवान
  आराम करते STF जवान

अपराधियों का गढ़ रहा है कोशी दियारा

दियारा में करीब आधा दर्जन छोटे बड़े अपराधी गिरोहों का वर्षो से बचस्व कायम रहा हैं।जिनमें रामपुकार यादव,रामानंद यादव,ने भी दियारा में अपना वर्चस्व दिखाया।वर्ष 2006 में दियारा का कुख्यात इंगलिस चैधरी को सरस्वती पुजा के दिन कबीरपुर गांव में लगे मेले के दौरान एसटीएफ ने मुठभेड में मार गिराया।उसके बाद गिरोह कि कमान सत्तन चैधरी के पास आ गई इधर छबीया यादव के अंत के बाद रामपुकार यादव के पारिवारकि गिरोह की कमान विपीन के पास थी जो पिछले साल एसटीएफ के हत्थे चढ़ा |

कारवाई कर लौटती STF टीम
कारवाई कर लौटती STF टीम

रामपुकार था सरगना

रामपुकार यादव पुर्णिया जिले के जानकी नगर थाना क्षेत्र में एक आपसी गेंगवार में मारा गया। रामपुकार की मारे जाने के बाद गिरोह की कमान छोटे भाई रमेश यादव ने संभाल लिया इस बीच सत्तन चौघरी व रमेश यादव के बीच वर्चस्व को लेकर गोलाबारी व हत्या की घटना बीते वक्त में होती रही जिसकी वजह से दोनो गिरोह पुलिस के लिये सरदर्द बनी रही |

फुर्सत के क्षण
फुर्सत के क्षण

सत्तन का था दबदबा

खगड़िया जिले के धमहारा धाट से पुरब सिसवा गावं में साल 2008 में सत्तन चैधरी को मुठभेड़ मंे पुलिस ने मार गिराया हलांकि पुलिस के सहयोगी मुखिया विजय यादव भी इस मुठभेड में मारे गये। सत्तन चौघरी के मारे जाने के बाद दियारा क्षे में रमेश यादव की एक बार फिर से वापसी हो गई एक फिर रमेश यादव की तुती दियारा क्षेत्र में बोलने गली।

बरामद असलहा के साथ टीम लीडर
बरामद असलहा के साथ टीम लीडर

गेंगवार में मरा रमेश

बनमा ईटहरी के खुरेशान गांव चिमना रहि बहियार में गैंगवार में कुख्यात रमेश यादव व सर्प सुटर बैदनाथ यादव की हत्या जाहिद उर्फ कमांडों के द्वारा कर दी गईं।रमेश के मारे जाने के बाद उसके उत्तराधिकारी के रूप में छोटे भाई छबिया यादव ने गिरोह कि कमान संभाल ली।अंतत वर्ष 2009 में खगड़िया जिले के कैंजरी मोड़ के समीप पुलिस मुठभेड में छबिया यादव व उसके दो सहयोगी का अंत हो गया।koshixpress

अब तक रहा है रामानंद का राज

दियारा के एक बड़े हिस्से में आज रामानंद यादव गिरोह का राज चलता हैं बीते वर्ष ही वह जमानत पर सहरसा जेल से बाहर आये है।इसी बीच खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड के पुस्ककालय चौक के समीप अलौली के पैक्स अध्यक्ष राजेश यादव को बीच पर मोटरसाईकिल सवार अपराधियों वे गोलियों से छल्लनी कर दिया।इस हत्या के पीछे रामानंद का हाथ होने की बात कहीं गई चुकी पैक्स अध्यक्ष व रामानंद के बीच 35 बीधा जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। उसी केश में गिरोह के सरगना रामानंद यादव को पकड़ने के लिये एसटीएफ की टीम ने शुक्रवार को दियारा के क्षेत्र में कार्यवाही कि हलांकि इस कार्यवाही में गिरोह के मुखिया रामांनद यादव भागने में सफल रहा लेकिन उसका एक बेटा सहित पांच लोग एसटीएफ के हत्थे चढ़ गया।koshixpress

दियारा में लाल आंतक का डर

शुुक्रवार को हुई घटना के बाद कोशी दियारा ईलाके में लोगों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है कि अगर पुलिस रामानंद गिरोह का सफाया कर देती है तो दियारा क्षे में लाल आतंक यानि नक्सलीयों का पैथ मजबुत हो सकता है चुकि कालान्तर में कोशी दियारा में नक्सलीयों व रामानंद गिरोह के बीच कई वार आमना सामना हो चुका कई बार रामानंद गिरोह पुलिस को भी नक्सलीयों के सफायो में सहयोगी बन चुका हैं।