नहाय-खाय के साथ जिउतिया आज से,संतान की दीर्घायु के लिए महिलाएं रखती हैं व्रत !

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kx desk : नहाय-खाय और मछली एवं मरुआ रोटी खाने के साथ ही संतानों की लम्बी उम्र के लिये माताओं का निर्जला व्रत जिउतिया आज से प्रारंभ हो गया । कहते हैं कि यही एक मात्र ऐसा पर्व है जो किसी देवी देवता को समर्पित न होकर किसी राजा के आदर्शों के निमित्त मनाया जाता है। इस पर्व में महिलाएँ अपने पुत्र-पुत्रियों की लम्बी उम्र के लिये 24 से 26 घंटे का निर्जला उपवास रखती है । यह पर्व कई मायनों में अजूबा होता है । नहाय खाय की रात अहले सुबह उठ कर मृत पूर्वजों को दही,चूरा एव केला का भोग लगा कर सभी बच्चों को प्रसाद के रुप में देने की परम्परा रही है । नींद से जगा कर खिलाया जाने वाला यह प्रसाद “ओटकन” कहलाता है । व्रतियां उषा रानी,सुलेखा देवी,गीता कुमारी,पुष्पा देवी बताती हैं कि जीवतिया पर्व की सुबह पान खाना शुभ माना जाता है । इसके अलावे कई ऐसी वस्तुएँ हैं जिनका सामान्य दिनो में कोई खास महत्व नही है पर पर्व में महत्ता बढ़ जाती है । झींगा का पत्ता,सरसों की खल्ली,नोनी का साग कुछ ऐसी ही अनिवार्य समझी जाने वाली वस्तुएँ हैं ।

  • महिलाएं रखेंगी निर्जला व्रत

संतान की दीर्घायु के लिए महिलाएं  रखती हैं व्रत

भारतीय संस्कृति में अश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी का विशेष महत्व है।  घर घर में महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए निराधार व्रत धारण करती हैं। संसार पुर निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर, पिपरा निवासी पंडित चन्द्रभुषण मिश्र,आदि बताते हैं कि तीन दिवसीय जिवित्पुत्रिका व्रत 22 सितंबर से प्रारम्भ हो जाएगी। 22  को  दिन में महिलाएं श्रद्धा पूर्वक नदी या सरोवर में स्नान करेंगे। जिसे आमतौर पर नहाय खाय कहा जाता है। एवं सुबह 4 बजे उटगन ( आॅगठ ) यानी स्नान कर के व्रतधारी महिलाएं हल्का भोजन प्राप्त करेगी।उसके बाद 23 सितंबर को सुबह से अष्टमी व्रत प्रारंभ हो जाएगी।महिलाएं दिन रात निराधार व्रत रखेगी। ओर 24 सितंबर को पारण करेगी। जिवित्पुत्रिका व्रत तीन दिनों का अनुष्ठान हैं ।।

पकवानों से सजेगी डाली

जिवित्पुत्रिका व्रत धारण करने वाली महिलाएं ने बताया कि अखण्ड डाला में नारियल, खीरा,बांस के पत्ते, जियल के पत्ते,पान, सुपारी, जनेऊ,कई तरह के फल एवं पकवान भर कर लाल कपड़े में बांध दिया जाता हैं। व्रतधारी महिलाएं जिवित्पुत्रिका व्रत की कथा श्रवण करती हैं। व्रत  का पारण करने के पूर्व घर के संतान अखण्ड डाली   पर रखे लाल रंग के कपड़े को हटाते हैं। इसके बाद ही व्रतधारी जिवित्पुत्रिका व्रत का पारण करती हैं। पारण में व्रतधारी भात, नोनी की सब्जी, साग एवं मडुवा की रोटी ग्रहण करती हैं ।

पौराणिक कथा

भारतीय संस्कृति में पर्व त्यौहार का विशेष महत्व है। सभी पर्व पौराणिक कथा से जुड़ी हुई हैं।जिमुत वाहन राजा ने गरुड़ से मुक्ति दिलाकर कई मृत पुत्रों को जीवित करवाया था। द्रोपती ने अपने पुत्र की दीर्घायु के लिए  जिवित्पुत्रिका व्रत रखा था।उसके बाद महिलाएं अपने संतान की दीर्घायु के अश्विनी माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी को जिवित्पुत्रिका व्रत करती आ रही हैं। यह व्रत प्रत्येक घर में महिलाएं करती हैं।

  • 22 को नहाय खाय  
  • 23 खर जिउतिया व्रत
  • 23 को डाली भराई
  • 24 को पारण   एवं 
  • 24 को खोला जाएगा

(रिपोर्ट – संजय कुमार सुमन / मुकेश कुमार मिश्र)