संयुक्त जांच में जमाबंदी पंजी के साथ छेड़छाड़ की हुई पुष्टी,चार सदस्यीय टीम ने एसडीओ को रिपोर्ट सौपा !

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राजस्व कर्मचारी पर हो सकती है प्राथमिकी के साथ निलंबन की कार्यवाही

सहरसा/सिमरी बख्तियारपुर : बख्तिारपुर मौजा के जमाबंदी संख्या 415/4 में छोड़छाड़ की पुष्टी एसडीओं के द्वारा गठित चार सदस्यीय जांच टीम ने पुष्टी कर दी हैं। संयुक्त जांच टीम के सदस्य कार्यपालक पदाधिकारी, अंचलाधिकारी,प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अवर निर्वाचन पदाधिकारी सभी सिमरी बख्तियारपुर ने अपनी संयुक्त हताक्षरित रिपोर्ट एसडीओं को सर्मपित कर दी हैं। जांच में मौजा के राजस्व कर्मचारी हेमंत कुमार के द्वारा जिम्मेदारी निर्वाहन में चुक करनी की बात कही गई हैं। ईतना ही नही जांच में जो सबसे बड़ी बात सामने आई है कि उक्त पंन्ने में 5 फरवरी 98 के तत्कालीन अंचल निरक्षण का फर्जी हस्ताक्षर कर उक्त पन्ने को देख कर जांचने की बात लिखी गई हैं।

संयुक्त जांच टीम के द्वारा दोषी पाये जाने के बाद राजस्व कर्मचारी हेमंत कुमार पर निलंबन की तलवार लटकने के साथ प्राथमिकी भी कार्यवाही होने की बात सामने आ रही हैं।इस संबंध में एसडीओं सुमन प्रसाद साह ने बताया कि जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट दें दी है रिपोर्ट का अवलोकन उपरांत अग्रतर कार्यवाही के लिये जिलाधिकारी सहरसा को प्रतिवेदन भेजी जा रही हैं।

एसडीओं ने अंचल में की थी छापेमारी 

गत 20 अक्टुबर को सिमरी एसडीओं सुमन प्रसाद साह व अंचलाधिकारी धमेन्द्र पंडित ने अंचल कार्यालय सिमरी बख्तियारपुर पर छोपेमारी कर बख्तियारपुर मौजा के रजिस्टर टू को की जांच कर जमाबंदी में छेड़छाड़ की आशंका व्यक्त करते हुये सभी कागजात जप्त कर ली थी साथ ही एक जमांबदी में छेड़छाड़ की जांच करने के लिये एक चार सदस्यी जांच टीम गठन कर दिया था।

क्या है पुरा मामला

वर्तमान में जमाबंदी संख्या 415/4 अब्दुल रहीम के नाम से चल रही है जिसका जिसका कुल रकवा 1 बीधा 6 कट्टा 9 धूर 10 धूरकी है। 23 मार्च 1976 ई० के बाद करीब 40 वर्षो बाद 21 फरवरी 2016 को इस जमीन की मालगुजारी रसीद वित्तीय वर्ष 2015-16 काटी गई। पुन दो माह बाद 14 अप्रैल 16 को वित्तीय वर्ष 2016-17 की रसीद काटी गई ।करीब 40 वर्षो तक उक्त जमीन के मालिक ने जमीन की मालगुजारी रसीद नही कटवाई लेकिन दो माह में दो बार रसीद कटवा संदेह उत्पन्न कर दी थी की छेड़छाड़ कर यह कारनामा किया गया। ईतना ही नही उक्त पन्ने के आगे पीछे पन्ने पर जिस व्यक्ति की लिखाबट प्रतीक होती वह लिखावट से इस पन्ने में लिखी गई नाम मिलता प्रतीक नही होने की बात सामने आई थी। छेड़ाफेड़ी की करतूत यही नही रूकी थी सन 1998 के तत्कालीन अंचल निरक्षक के के सिंह के द्वारा उक्त पन्ने के अलावा आगे पीछे एक एक पन्ने का जांच कर सही पाने का हस्ताक्षर दिखाया गया जब के के सिह के हस्ताक्षर से उक्त हस्ताक्षर का मिलान से साफ तौर पर फर्जी हस्ताक्षर प्रतिक हो रही थी। चुकिं जमाबंदी रजिस्टर में यह छेड़छाड़ का मामला कोई नया नही था इससे पूर्व डीसीएलआर रासीद हुसैन ने भी जमाबंदी रजिस्टर में छेड़छाड़ की बात पकड़ी थी लेकिन जबतक वे इसके दोषी तक पहुंच पाते उनका तबादला हो गया। अब देखना होगा की इस मामले में क्या होता है।

जमांबदी पंजी में खाता,खेसरा अंकित नही है 

कार्यालय में उपल्बध रजिस्टर टू में रैयतो के नाम जमाबंदी नंबर के साथ अंकित है लेकिन ना तो यह बात अंकित है की अंकित रैयत का खाता क्या है किस किस खेसरा की जमीन की यह जमाबंदी है सिर्फ कुल रकवा दिया गया। अगर यहां जमाबंदी से नाम छेड़छाड़ हुआ तो आप यह साबित नही कर पायेंगे की वह जमाबंदी किसका है।इसी बात का फायदा भूमाफिया उठाते है।

कार्यालय में नही है रजिस्टर टू के अलावा कोई रेकर्ड

इस अंचल कार्यालय में रजिस्टर टू के अलावा किसी प्रकार का कोई जमीन से संबंधित कागजात नही है। ना तो जमींदार के द्वारा दिया गया जमीन का रिर्टन की प्रति है ना ही रैयती खतियान है ईतना ही नही खेसरा पंजी तक उपलब्ध नही है। उपरोक्त कागजात नही होने की जानकारी हल्का कर्मचारी ने मांगी गई सुचना में लिखित रूप में दिया है की खेसरा पंजी,रैयती खतियान कार्यालय में उपलब्ध नही हैं ।

कहां गया कार्यालय का रेकर्ड 

आजादी के बाद जब जमींदारी प्रथा सरकार खत्म कर सभी जमींदारों से जमीन ले उसे रैयतो के बीच वितरण कर दिया गया । जो जमीन बच गई वह सरकार के खाते में चला गया । जानकार का कहना है की दस साल पूर्व तक कार्यालय में सभी कागजात उपल्बध थें कई लोगों नें उस वक्त कार्यालय से नकल भी ली लेकिन अब वह कागजात कहा गया क्यो नही है कार्यालय में कागतात इसका दोषी कौन है। क्या इस बात की जांच होगी की कहां गया वह कागजात ? दोषी कौन ?