नीतीश सरकार मे पत्रकारों की जान की कीमत कुछ भी नही,हम अपना हक ले कर रहेंगे – रामनाथ विद्रोही !

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लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ

संजय कुमार सुमन : इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन बिहार प्रदेश के अध्यक्ष  रामनाथ विद्रोही ने कहा कि बिहार मे पत्रकारों की जान की कीमत एक ठेला पर सामान बेचने वालो की तरह भी नही है कहने को तो सुशासन की सरकार है लेकिन जब किसी पत्रकार की हत्या हो जाती है तो सरकार कान मे तेल डालकर सो जाती है |वही कोई सड़क दुर्घटना मे मरता है तो चार लाख का.मुआवजा देतीं है |पत्रकार राजदेव रंजन को सरकार एक पैसा मुआवजा नही दिया.यही स्थिति हाल  ही में गोली मारकर हत्या किये गये सासाराम के पत्रकार धर्मेंद्र सिंह की है अभी तक सरकार ने किसी तरह की मदद नही किया है.उन्होंने कहा कि यह  कितनी शर्म की वात है की पत्रकार को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा गया है लेकिन जब उसकी हत्या कर दी  जाती है तो कोई नही देखता.यहाँ तक की विपक्ष भी रूटीन वर्क की तरह कूछ बयान देकर सो जाता है.वही यदि एक साधारण आदमी की मौत वाहन दुर्घटना मे हो जाती है तो एक सप्ताह के अंदर ही सरकार मूआवजे के रुप मे चार लाख की भुगतान करती है |koshixpress

यह सरकार की कैसी नीति है पत्रकारों के साथ

अध्यक्ष विद्रोही ने कहा कि इधर देखा भी गया है जब किसी पत्रकार की हत्या हो जाती है तो.कुकुरमुत्ते की तरह रातो रात पत्रकार संघ एवं  क्लब की जन्म हो जाती है.कूछ बयान आ जाता है कही कही धरना और कैंडल मार्च भी होता है.फोटो न्यूज़ छपवाये जाते है उसके कूछ दिन बाद लोग भूल जाते हैं.बिहार मे एक मात्र.इंडियन जर्नलिस्ट्स असोसिएशन ही एक ऐसी.पत्रकारों की संगठन है जो लड़ाई को अंत तक पहुँचाता है.चाहे राजदेव हत्या कांड हो.चाहे बाँका डीएम का तुगलकी आदेश या मुजफ्फर पूर के बरूराज का विकाश उत्पीड़न कांड असोसिएशन बिहार के 35 जिलों और देश  के 21 राज्यों के संगठन के साथियों के बल पर अपनी लड़ाई को अंतिम पायदान तक पहुँचाने के लिये तत्पर है हम अपना हक लेकर रहेंगे |पत्रकारों की शहादत को बेकार नही जाने देंगे.उन्होंने सभी पत्रकारो से आह्वान करते हुए कहा कि  हम  अपनी लड़ाई को सम्बल देते हुये 25 नवम्बर को पटना प्रदर्शन और धरना को सफल बनावे और अपनी ताकत का अहसास कराते हुये पत्रकारों शहीद पत्रकारों के परिजनों की आवाज़ बनकर अपनी माँग हासिल करे|