Episode:1.0 बाहुबली आनंद मोहन(राजपूत )छोटन शुक्ला(भूमिहार ब्राह्मण)और कलक्टर जी कृष्णैया (दलित )

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छोटन शुक्ला की मौत का बदला,लालू के प्रिय मंत्री बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड 

अस्सी के दशक में मुजफ्फरपुर का लंगट सिंह कॉलेज और यूनिवर्सिटी होस्टल अंडरवर्ल्ड के वर्चस्व की लड़ाई का मुख्यालय बन गया, बेगूसराय से आकर सम्राट अशोक ने यहां बादशाहत कायम की, 1995 तक मिनी नरेश, चंदेश्वर सिंह, छोटन शुक्ला और खुद सम्राट अशोक की लाशें बिछ गईं, ये अंडरवर्ल्ड का टर्निंग साल था, नेताओं के लिए मर्डर और बूथ कैप्चर करने के बदले अपराधियों ने खुद ही राजनीति में धाक जमाने की ठानी!

छोटन शुक्ला(फ़ाइल फ़ोटो)

5 नवंबर, 1994 की शाम मुजफ्फरपुर में डीएम की हत्या प्रतिक्रिया थी, ठीक एक दिन पहले अंडरवर्ल्ड डॉन छोटन शुक्ला की हत्या हुई थी और डीएम का मर्डर उन्हीं की शवयात्रा के दौरान हुई, ये वक्त बिहार की राजनीति में माफियाराज का स्वर्णकाल था, उस समय जो खून के छींटे निकले उनकी छाप आज भी बिहार में दिखाई दे रही है!

आनंद मोहन (फ़ाइल फ़ोटो)

लालू यादव समाज में जहर भी बो रहे थे, भूरा बाल (भूमिहार-राजपूत-ब्राह्मण-लाला यानी कायस्थ ) साफ करो की बात कर लालू ने सवर्णों को गोलबंद कर दिया, जगह-जगह जातीय दंगे हुए, यादव बिरादरी के लोगों को थानेदार बनाने के आरोप लगे! 1995 में लालू यादव की दूसरी परीक्षा थी, इस विधानसभा चुनाव से पहले 1994 में ही वैशाली में लोकसभा का उपचुनाव हुआ, इससे पहले आनंद मोहन को ज्यादा नहीं जानते थे, उन्हें सहरसा के रॉबिनहुड कहा जाने लगा, ये भी सच है कि लालू आगमन के बाद कसमसाए बिहार के अगड़ों में उनके संभ्रांत नेताओं ने नहीं बाहुबली नेताओं और कथित अपराधियों ने आस जगाई, इन्हीं में एक आनंद मोहन ने लालू को खुलेआम चुनौती दी और वो भी उसी की भाषा में, लालू विरोध को आवाज मिली आनंद मोहन की बिहार पीपुल्स पार्टी से!

वैशाली उपचुनाव में आनंद की पत्नी लवली ने टक्कर दी किशोरी सिन्हा को, पूरे बिहार के एंटी लालू वैशाली की तरफ देख रहे थे, सूरज ढलने तक ये क्लियर हो गया कि लवली जीत रही हैं, नतीजे घोषित होने के बाद गोगल्स लगाए आनंद मोहन डायरेक्ट बोले- छह महीने में हम बिहार के सीएम होंगे.. आनंद महोन जिंदाबाद के नारों से फिजा बदल गई, छोटन शुक्ला को केसरिया विधानसभा से टिकट मिला! 4 नवंबर की शाम केसरिया में प्रचार करने के बाद एम्बेसेडर से छोटन शुक्ला घर लौट रहे थे, रात 8 से नौ बजे के बीच उनकी गाड़ी शहर के संजय सिनेमा हॉल के पास पहुंची जहां पुलिस की वर्दी में कुछ लोगों ने रुकने का इशारा दिया, गाड़ी रुकते ही बर्स्ट फायर से पूरा इलाका थर्रा उठा, मिनटों में छोटन शुक्ला समेत पांच लोग गोलियों से भून डाले गए, एके 47 के इस्तेमाल से सारा शहर कांप उठा, मौके पर ही छोटन शुक्ला समेत चार अन्य सवर्ण लोगों की हत्या कर दी गई! लाश सड़क पर रख दी गई और हत्यारों द्वारा पूरा तय किया गया कि उनकी मृत्यु हो गई है उसके 10 मिनट बाद हत्यारे वहां से गए उसके कुछ देर बाद पुलिस वाले आए लेकिन उन्होंने किसी को लाश छुने नहीं दिया न अस्पताल ले जाने का कोशिश किया बल्कि उन्होंने कहा कि ऊपर से आदेश है जब तक SP साहेब नहीं आएंगे कोई लाश को नहीं छूएगा, लगभग 1 घंटे बाद SP सहाब आए और उसके बाद लाश को अस्पताल ले जाया गया जहां पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया!

छोटन शुक्ला हत्याकांड के बाद पूरा मुजफ्फरपुर और वैशाली जिला जल उठा जगह-जगह तोड़फोड़ और आगजनी की जाने लगी कुछ देर बाद आनंद मोहन सिंह वहां पर पहुंचे और अगले दिन छोटन शुक्ला की अंतिम संस्कार के लिए उन्हें ले जाया जा रहा था भीर काफी उग्र थी, उस भीड़ का नेतृत्व आनंद मोहन और मुन्ना शुक्ला कर रहे थे, भड़काऊ बयानबाजी लगातार किए जा रहे थे, तभी हाजीपुर से मीटिंग करके गोपालगंज के डीएम कृष्णैया लौट रहे थे और उस भीड़ के बीच से उन्हें गुजारना था लेकिन तभी उग्र भीड़ ने उनके ऊपर हमला कर दिया और उनकी वहीं पर मृत्यु हो गई!

छोटन शुक्ला के मर्डर के पीछे बृजबिहारी प्रसाद का हाथ होने की बात सामने आई, 1995 के चुनाव के बाद लालू के प्यारे बृजबिहारी प्रसाद ईनाम स्वरूप कैबिनेट में विज्ञान और तकनीकी मामलों के मंत्री बने!

वर्षों की सजा काटने के बाद अब आनंद मोहन बाहर निकले हैं और कुछ वर्ष पूर्व मुन्ना शुक्ला भी जेल काट के बाहर आए और विधायक भी बनें!

लेकिन कहानी यहीं पर खत्म नहीं हुई, पढ़िए एपीसोड 1 कैसे लालू के प्यारे बृज बिहारी प्रसाद को मारकर छोटन शुक्ला की हत्या का बदला लिया गया….

साभार: चंदन शर्मा