सांस्कृतिक प्रतिरोध : देश की आज़ादी में इप्टा के योगदानों को भुला नही जा सकता – राजन

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सहरसा : स्थानीय कला भवन परिसर सुपर बाज़ार में भारतीय जन नाट्य संघ के रंगकर्मियों,संस्कृतिकर्मीयों ने इप्टा के 14 वें राष्ट्रीय सम्मेलन इंदौर पर हुए फासिस्ट हमले के खिलाफ बुधवार को सांस्कृतिक प्रतिरोध दिवस मनाया | koshixpress

सांस्कृतिक प्रतिरोध सभा की अध्यक्षता करते हुए इप्टा के प्रदेश सचिव राजन कुमार ने कहा कि इप्टा एक जन आन्दोलन है |देश की आज़ादी में इप्टा के योगदानों को भुला नही जा सकता है |संस्कृतिकर्मीयों पर हो रहे हमले को देश के लिए घातक बताते हुए उन्होंने कहा कि इंदौर में इप्टा के सम्मलेन में फासिस्टों ने कार्यक्रम में बाधा पहुंचाकर देश की गरिमा को धक्का पहुंचाया है| प्रदेश सचिव श्री कुमार ने कहा कि इप्टा गरीबों,शोषितों व मजदूरों की आवाज है |आम-आवाम के हक-हकूक की लड़ाई गीत-संगीत के माध्यम से लड़ती आ रही है|संस्कृति को खत्म करने की साजिश करनेवाले देश भक्त नहीं देशद्रोही होते है|इसलिए इन तत्वों को रोकने की जरूरत है|उन्होंने कहा कि इप्टा ऐतिहासिक विरासत को अक्षुण्ण व समृद्ध बनाने की दिशा में सदैव प्रयासरत रहता है|इप्टा एक दुसरे को जोड़ने का काम करती है |इप्टा मुहब्बत का पैगाम देती है|

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हिफाजत के लिए आयोजित संस्कृतिक प्रतिरोध सभा का संचालन करते हुए अध्यक्ष विनय कसौधन ने सबों से फासिस्ट ताकतों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया |

प्रतिरोध सभा को सम्बोधित करते हुए इप्टा के सचिव रमेश पासवान एवं संयुक्त सचिव रोहिणी सिंह ने कहा कि इप्टा के राष्ट्रीय सम्मेलन में भी देश के प्रतिष्ठित चिंतनशील अनुभवी कलाकारों ने भी अपनी बातों को कलाकारों के बीच रखने की कोशिश की थी|इस बात पर किसी संगठन या व्यक्ति को कार्यक्रम में बाधा पहुंचना शर्मनाक है|यह अभिव्यक्ति की आज़ादी के मौलिक अधिकार का हनन है|koshixpress

कला भवन में आयोजित प्रतिरोध धरना को संबोधित करते हुए राज्य कार्यकारणी सदस्य एस०एस० हिमांशु ने कहा कि इप्टा के कलाकारों,फिल्मकारों,चित्रकारों,लेखकों,बुद्धिजीवियों ने खून पसीना एक कर देश-दुनिया में मानवतावादी और प्रगतिशील संस्कृति को आगे बढ़ाया है|इप्टा का संकल्प सबके लिए एक सुन्दर दुनिया है|जहां आपस में प्रेम,भाईचारा,सहिंसुणता हो और पढने-लिखने बोलने की आज़ादी है|

सांस्कृतिक प्रतिरोध दिवस के दौरान रंगकर्मियों,संस्कृतिकर्मीयों,कलाकारों ने ढोलक,नाल,हारमोनियम के साथ कई जनबादी गीतों की प्रस्तुती दी|एस०एस हिमांशु ने कई जनगीत प्रस्तुत किए वही कइयो ने कविता द्वारा फासिस्टो को अपनी सीमा में रहने की सलाह दी |

धरना कार्यक्रम में अजहर खान,गंगा राय,प्रिंस आनंद,मो० जमशेद,आशीष कुमार,राहुल कुमार,विकास भारती,अमित सिंह,मुकेश कुमार राजा,मिथुन राजा,गौरीशंकर कसौधन,पवन कुमार,मुकेश मुन्ना,सुशील गुप्ता,विष्णु कुमार साह,दीपक,अनिल सहित अन्य इप्टा कर्मी मौजूद थे|