कोसी व बागमती नदी में अभी भी सपना बना पुल !

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सलखुआ से मानसी सड़क मार्ग आखिर कब होगा पुरा

सहरसा/सिमरी बख्तियारपुर (ब्रजेश भारती) : मुख्यमंत्री के निश्चय यात्रा को लेकर जिले सभी प्रखंकों का रंग रोगन के साथ सभी विभागों को अपडेट करने का काम जोड़ सोर से किया जा रहा है,बिजली, पानी स्वास्थ्य सेवा में अपेक्षित सुधार का दावा किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इस अनुमंडल के सलखुआ प्रखंड के  माठा ढ़ाला से  बदलाघाट होते हुऐ मानसी तक सड़क व कोसी एवं बागमती नदीं में पुल का अभाव वर्षो से यहां के लोगो के लिये सपना बन कर रह गया है। बीते करीब सात वर्ष पूर्व ही माठा – धनछड़ सड़क व कोसी व बागमती नदीं में पुल निर्माण की चर्चा शुरू हुई थी। हलांकि माठा – फनगो तक तो पक्की सड़क व कई पुल पुलिया का निर्माण भी हुआ लेकिन कोसी बागमती नदीं में पुल निर्माण संभव नहीं हो पाया है। वही दियारा – फरकिया में स्वास्थ्य सुविधा का घोड़ अभाव है।koshixpress

वर्षो बाद भी कोशी-बागमती में नही बना पुल

साल दर साल गुजर गए। सांसद बदले लेकिन नहीं बनी माठा ढ़ाला, धनछड़-बदला घाट – मानसी को जोड़ने वाली पक्की सड़क व कोसी एवं बागमती नदी में पुल। माठा ढ़ाला- फनगो हाल्ट के बीच कई पुल तो बने लेकिन मिट्टी कार्य पूरा नहीं हो पाया है। वहीं बागमती एवं कोसी नदी में बनने बाले पुल का कहीं अता पता नहीं है। बदला-कोपरिया सड़क नहीं बनने से समय-समय पर क्षेत्र की आम जनता के अलावा सहरसा-मानसी रेलखंड के धमारा घाट के बीच ट्रेन परिचालन अवरूद्ध होने पर रेल यात्री को भी सड़क मार्ग के अभाव से भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। करीब सात वर्ष पूर्व ही माठा-धनछड़, बदला घाट सड़क का नींव रखी गयी थी जो आज तक पूरा नहीं हो पायी है। हालांकि उक्त सड़क निर्माण कार्य के समय क्षेत्र वासी के बीच खुशी की लहर दौड़ी थी। अधूरा सड़क निर्माण को देख इलाके के लोगों ने मन बना रखा है कि विधानसभा चुनाव में वायदे करने वाले नेता जी को उक्त सड़क का मुद्दा बता मतदान किया जाएगा।

वर्ष 2009-10 में शुरू हुआ था निर्माण कार्य

बीते सात वर्षों से सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड के कोपरिया पंचायत अन्तर्गत माठा ढ़ाला से धनछड़ बदला घाट- मानसी-खगड़िया जिले समेत राजधानी पटना को जोड़ने वाली सीधा सड़क इलाके के लोगों के लिए आज भी सपना है। वर्ष 2009-10 में माठा-धनछड़ सड़क की घोषणा की गयी। तत्कालीन सांसद प्रयास से शुरू कराने में सफलता मिली थी। लेकिन सात साल में कार्य पूर्ण नहीं हो पाया। जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।

माठा- बदला सड़क से क्या होगा फायदा

बदला-कोपरिया सड़क बनने से सहरसा एवं खगड़िया जिले कि दूरी लगभग 14.15 किलोमीटर कम हो जाएगी और कोपरिया, फनगो, धमारा घाट, बदला घाट, साम्हरखुर्द समेत सहरसा-खगड़िया जिले के दर्जनों पंचायत के 40-50 गांव का सीधा सम्पर्क दोनों जिला समेत राजधानी से जुड़़ जाएगा। सड़क व पुल निर्माण कार्य पूर्ण होते ही इन सभी गांव का विकास भी होगा।koshixpress

आजादी के बाद भी फरकिया क्षेत्र में सुविधा का अभाव

आजादी के 68 साल बाद भी कोसी दियारा-फरकिया क्षेत्र में सड़क बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मुलभूत सुविधा का घोर अभाव बना है।कहा जाता है कि वर्षो पूर्व राजा टोडरमल ने तटबंध के भीतर वाले भूभाग व तटबंध के बाहर वाले इलाके में फरक व दोनो में अंतर कर दिया था। जिस कारण आज भी तटबंध के भीतर के इलाके को फरकिया के नाम से जाना जाता है। इतना ही नही आजादी के बाद से हर चुनाव के समय नेता अपनी कुर्सी के लिए ग्रामीण फरकिया के भोले-भाले मतदाताओं को लोकलुभावन वायदे कर बोट तो ले लेते हैं। लेकिन किये वायदे भूल जाते है।

सड़क के अभाव ने गई 28 श्रद्धालु की जान

बदला-कोपरिया वर्षों से सड़क निर्माण की बात होती रही है। लेकिन सड़क निर्माण संभव नहीं हो सका है। वर्ष 2013 में 19 अगस्त को मां कात्यायनी स्थान पूजा-अर्चना करने जा रहे 28 श्रद्धालुओं की मौत सहरसा-पटना राज्यरानी सुपरफास्ट ट्रेन से कट कर हो गयी। घटना के बाद भी नेता व रेल प्रशासन ने सड़क समेत धमारा स्टेशन का विकास की घोषणा की। लेकिन आज तक न मंदिर तक पक्की सड़क ना ही धमारा घाट स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज व नया प्लेटफार्म का निर्माण कार्य पूर्ण हो पाया है।

क्या कहते हैं ग्रामीण

सुरेेश यादव, रबीन चौधरी, उदय सिंह,लक्षमण सिह,नरेश यादव आदि ने बताया कि बदला-कोपरिया सड़क मार्ग नहीं पूरा होने से आवागमन का एक मात्र साधन रेल मार्ग ही है।सरकार गांव-गांव में पक्की सड़क समेत अन्य विकास योजनाओं का दावा कर रही है। लेकिन कोसी के इस फरकियावासी के लिए आज भी सड़क, स्वास्थ्य एवं बिजली के अभाव जुझ रहे है। जिससे दियारा-फरकियावासी परेशानी के दौड़ से गुजरते रहते हैं।