धूमधाम से मनाया जा रहा भैया दूज पर्व !

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सहरसा :जिले सहित प्रखंड क्षेत्र में आज भाई दूज का त्यौहार बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक कर उनकी लम्बी आयु व मंगलमय जीवन की कामना करते हुए प्रेम पूर्वक मनाया|चित्रगुप्त की पूजा कर भाई दूज मनाया गया|भाइयों ने भी बहनों को उपहार देकर अपना स्नेह प्रकट किया|भाई दूज पूजा का महत्व पौराणिक गाथाओं में भी मिलता है| पुराणों के अनुसार भाई यमुना नदी में स्नान कर बहन के घर जाकर तिलक करवाकर भोजन करता है तो उसे स्वर्ग प्राप्ति होती है इसलिए भाई हर सम्भव स्वयं बहनों से टीका करवाते हैं|

क्‍यों मनाते हैं भाई दूज

भाई  दूज या भैया दूज में बहन रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य और लंबी आयु के लिए आर्शिवाद देती हैं। वहीं भाई बहनों को कुछ उपहार या नकद पैसा देता है। भाई दूज दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है। ये वो त्‍योहार है जो भाई और बहन के एक दूसरे के प्रति स्नेह को अभिव्यक्त करता है। साथ ही बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं। कहा जाता है कि यम देवता ने अपनी बहन यमी (यमुना) को इसी दिन दर्शन दिया था, जो बहुत समय से उससे मिलने के लिए व्याकुल थी। अपने घर में भाई यम के आगमन पर यमुना ने बहुत प्रेम या स्‍नेह से उसकी आवभगत की जिस पर यम ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि इस दिन यदि भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करेंगे तो उनकी मुक्ति हो जाएगी।

भाई दूज की कहानी

भारत में हर त्यौहार के साथ कहीं न कहीं लोक मान्यतायें और कथायें जुड़ी होती हैं। इस त्यौहार की भी एक पौराणिक कथा है। जिसमें यमराज अपनी बहन यमी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मिलने पहुंचते हैं। यमी अपने भाई की खूब सेवा सत्कार करती है। बहन के सत्कार से यमराज काफी प्रसन्न होते ळैं और उनसे कहतें कि बहन वरदान मांगो। भाई के ऐसा कहने पर यमी जो वास्‍तव में यमुना नदी हैं कहती हैं की जो भी प्राणी यमुना नदी के जल में स्नान करे वह यमपुरी न जाए। यमी की मांग को सुनकर यमराज चिंतित हो जाते हैं। यमी भाई की मनोदशा को समझकर यमराज से बोली अगर आप इस वरदान को देने में सक्षम नहीं हैं तो यह वरदान दीजिए कि आज के दिन जो भाई बहन के घर भोजन करे और मथुरा के विश्राम घाट पर यमुना के जल में स्नान करे उस व्यक्ति को यमलोक नहीं जाना पड़े। यमराज ये आर्शिवाद दे देते हैं। इस पौराणिक कथा के अनुसार ही आज भी परम्परागत तौर पर भाई बहन के घर जाकर उनके हाथों से बनाया भोजन करते हैं ताकि उनकी आयु बढ़े और यमलोक न जाना पड़े। साथ ही अपने प्रेम व स्नेह को प्रकट करते हुए बहन को आशीर्वाद देते है और उन्हें वस्त्र, आभूषण एवं अन्य उपहार देकर प्रसन्न करते हैं |

रिपोर्टनिरंजन